Tuesday, May 26, 2009

देश से बाहर आईपीएल कराने के फायदे!

धर्मेंद्र कुमार

आईपीएल-2 खत्म हो गया। अपने पहले संस्करण की तरह शुरू से ही चर्चित रहे इंडियन प्रीमियर लीग-2 को इस बार 'इंडिया' में आयोजित नहीं किया गया। कुछ जटिलताओं के चलते आयोजन को इस बार देश से बाहर दक्षिण अफ्रीका में कराया गया।
शुरू से ही विश्लेषकों में यह विचार मंथन चल रहा था कि देश से बाहर मैच कराने से क्या नफा-नुकसान होंगे। लोगों ने अपनी-अपनी राय दी! यहां एक बानगी...
लोगों का मानना है कि इस बार के टूर्नामेंट में खेल का स्तर बहुत बढ़िया रहा। दरअसल अनावश्यक उत्तेजना से माहौल खराब होता है। एशिया उपमहाद्वीप के लोगों में ऐसे समय गजब की उत्तेजना देखी जाती है। इसका सीधा असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन और खेल की भावना पर पड़ता है। पिछली बार के आयोजन में श्रीसंत और हरभजन सिंह के बीच हुई मारपीट की घटना इसी का परिणाम थी। कम से कम अबकी बार ऐसी कोई घटना देखने को नहीं मिली।
लोगों का तो यहां तक मानना है कि आईपीएल सहित दूसरी क्रिकेट की स्पर्धाएं भी देश से बाहर ही होनी चाहिए। इससे न केवल देश की ब्रांड इमेज को फायदा होगा, बल्कि इसके राजनीतिक फायदे भी उठाए जा सकते हैं। खासकर वेस्ट इंडीज, कनाडा जैसे देशों में इस तरह की भारतीय प्रतिस्पर्धाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे दूसरे देशों के साथ भारतीय समुदाय और मजबूती से जुड़ेगा। व्यापार को अलग से फायदा होगा।
सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। इस नजर से देखें तो कुछ छोटे देश इस तरह के आयोजनों के लिए पूरी तरह मुफीद हैं। जहां तक बात वहां क्रिकेट के पॉपुलर होने या न होने की है तो आज लाइव टेलीविजन का जमाना है। मैच क्रिकेट प्रेमियों से छूटेगा नहीं।
इस बार इस प्रतियोगिता के साथ ही भारत में चुनाव भी हुए। यदि यह आयोजन भारत में हुआ होता तो संभवत: इसका सीधा-सीधा असर मतदान पर भी पड़ता। मतदान प्रतिशत में कमी होने की पूरी संभावना थी। भीषण गर्मी के चलते वैसे ही मतदाताओं को घर से निकालना मुश्किल हो रहा था, उस पर ड्रॉइंग रूम में क्रिकेट का मैच...आप समझ सकते हैं। भौगोलिक स्थिति का भी फायदा मिला। भारतीय समयानुसार मैच देर शाम को ही हुए।
एक खास बात यह भी है कि ऐसे आयोजनों के चलते होने वाली गंदी खेल राजनीति को इस बार जबर्दस्त धक्का लगा। मैदान से बाहर खेलने वाले 'खिलाड़ियों' को ज्यादा मौका नहीं मिला। पूरा टूर्नामेंट शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। नेताओं, पुलिस, पत्रकारों और वीआईपी का तमगा लगाए दूसरे लोगों को मुफ्त के टिकट बांटने से भी आयोजक बच गए।
इसी दौरान, विद्यार्थियों को परीक्षाओं की तैयारी करने का भी पूरा मौका मिला। अन्यथा वे कुछ और समय जरूर बर्बाद करते। हालिया घोषित नतीजे इस तथ्य की पुष्टि भी करते हैं।
आखिर में एक और तथ्य...एक सज्जन की रोचक टिप्पणी थी कि इस बार हम अपना समय बचाते हुए द. अफ्रीकियों का समय बर्बाद करने में पूरी तरह सफल साबित हुए हैं। आगे भी इस प्रकार के आयोजन दूसरे देशों में ही होने चाहिए।

Friday, May 22, 2009

जीत तो हमेशा जनता की होती है!

धर्मेंद्र कुमार
संप्रग में जश्न का माहौल है। लेकिन, सही मायनों में जीत उनकी नहीं, जनता की हुई है... और इस बार ही नहीं, आजादी के बाद से हर बार हम भारतीयों ने इसे सिद्ध किया है। देश की जनता कभी किसी के बरगलाने में नहीं आई। हर बार सही समय पर बिल्कुल सही फैसला लिया। शायद यही वजह है कि दुनियाभर में भारत को सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र माना जाता रहा है।

यह दीगर बात है कि देश के नेता जनता के फैसलों को अक्सर 'अप्रत्याशित' बताते रहे हैं। देश की आजादी के बाद पहले आम चुनावों से शुरुआत करें तो यह एकदम साफ हो जाता है। आजादी के बाद 1952 में हुए पहले आम चुनाव में देश की जनता ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस को सरकार चलाने की जिम्मेदारी सौंपी... उनके आजादी के संघर्ष का सही मूल्यांकन करते हुए।

पहले कार्यकाल के दौरान देश के नवनिर्माण में जुटे रहे नेहरू को देश के इन्हीं नागरिकों ने 1957 में अगले चुनाव के दौरान दूसरा मौका भी सौंपा... यही नतीजा 1962 में भी रहा...पढ़े

Friday, May 01, 2009

MWS Launched New Version Of Mediabharti.com

Faridabad (India) (Mediabharti Syndication Service): Mediabharti Web Solutions, today, launched a new version of its flagship brand Mediabharti.com.

Dharmendra Kumar, The Editor, told that various new features have been incorporated to give it a new look and prove more useful for its user.

For smooth navigation, there are three Menus on site. First is Top Menu, which have Links for Other Editions, Contact us and to search the content in site or on internet.

Second, the Main Menu, has various sections like-- News, Editorials, Cinema, Television, Fashion, Automobile, Health, Life, Tech Guru, Variety, Jokes, Book Shelf, Women and Career.

The third menu is for just registered users.

Along with a section called ‘Blog’ has also given for those visitors, who have a low bandwidth internet connection. In this section, visitor would not be served the images and other heavy content.

In the main body of site, the ‘Latest stories’ and ‘Most Popular’ stories are given. Then the main story is being presented with two other stories. Visitors would now be able to rate stories according to their interests and judgments.

Besides it, the story can be seen in PDF format, print can be taken and even one can send the story to friends. Related stories links also would be provided with each story. There would be more features for registered users.

RSS version 0.91, 1.0, 2.0; Atom 0.3 and OPML service is also available for the visitors. With this service you can get the regular updates on your desktop. Even, you can add the content to your blog or Facebook profile.

Latest videos would be displayed on right hand side.

Below the videos, there are some modules. In these modules, you will get various write ups by well known faces of online media, along with photo gallery and special features.

There is a Poll question too.

Below, you will get the information that how many visitors are viewing the site with you.

There are only two advertisement modules to ensure visitors don’t get irritated or inconvenienced. All the advertisements would be shown in these two modules one by one. And strictly ‘No’ to pop ups.

नया मीडियाभारती डॉट कॉम : क्या है खास!

धर्मेंद्र कुमार
14 मार्च साल 2002 में लॉन्च होने के बाद मीडियाभारती डॉट कॉम ने अपनी सात साल की यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कई महत्वपूर्ण साथी इसके साथ जुड़े, कुछ अब तक जुड़े हैं, कुछ का साथ छूट गया, लेकिन यात्रा चलती रही। इस नए वर्जन के जारी होने के समय आज जब पीछे मुड़ के देख रहा हूं तो इससे जुड़ी कई यादें मुझे उद्वेलित कर रही हैं।

मुझे याद आ रही वो शाम जब हम कई पत्रकारिता के छात्र आगरा में पत्रकारिता गुरु बृज खंडेलवाल के घर इस बात पर विचार कर रहे थे कि आखिरकार ‘नौकरी’ कैसे मिले। हम विचार कर रहे थे कि नए छात्रों पर भरोसा करने वाले, उन्हें प्रोत्साहित करने वाले लोग बहुत कम हैं। जो हैं वे किसी भी प्रकार की मदद करने में सक्षम नहीं हैं, तो फिर क्या किया जाए... बात में बात चली तो पहुंची ‘मीडियाभारती डॉट कॉम’ तक। बृज खंडेलवाल (जिनके जेहन में शब्द ‘मीडियाभारती डॉट कॉम’ सबसे पहले आया) बोले, ‘क्यों न अपना खुद का पोर्टल लॉन्च किया जाए। मुद्दा भी यही...कि सभी संघर्षरत पत्रकारिता के छात्र मिलकर यहां योगदान दें और करें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन। जगाएं अपने आप में आत्मविश्वास और जुटें इस समाज के निर्माण में।'

बात जम गई और जन्म हुआ ‘मीडियाभारती डॉट क़ॉम’ का। तकनीकी और डिजायनिंग पक्ष संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई हमारे ही एक और शिक्षक विकास दिनकर पंडित को। उन्होंने करीब 10 दिन में पोर्टल का खाका तैयारकर काम शुरू कर दिया। तब से मैं खंडेलवाल जी को इस पोर्टल का ‘पिता’ और दिनकर जी को इस की ‘मां’ मानता हूं।

आप कह सकते हैं कि बच्चे को जन्म देने के बाद जरूरत थी उसको घर लाकर लालन-पालन करने की। मेरे साथ ये भूमिका निभाई मेरी दिवंगत पत्नी रश्मि गुप्ता ने। जो ‘सपना’ उन्हें मैंने दिखाया वह उन्होंने खुली आंखों से देखा। ...और मीडियाभारती डॉट क़ॉम ने अपनी यात्रा शुरू कर दी। 27 जून 2007 को उनकी मृत्यु के बाद एक बार तो मुझे लगने लगा था कि अब यह ‘यात्रा’ समाप्त हो जाएगी। लेकिन मेरे कुछ पुराने और कुछ बिल्कुल नए दोस्तों ने जो हौसला अफजाई की, वह इस रूप में मेरे सामने आएगी कभी सोचा भी न था…।

अब मैं जिक्र करूंगा मीडियाभारती डॉट कॉम में समाविष्ट उन नए तत्वों का जो पिछले संस्करण में नहीं थे। शुरुआत करते हैं लोगो से...इसमें अक्षर ‘एम’ पिछले लोगो से ही लिया गया है। जो हमें हमारे पुराने संघर्ष की याद दिलाता रहेगा।

पाठकों को सरल नेविगेशन मुहैया कराने के लिए तीन मीनू रखे गए हैं। पहले, टॉप मीनू में दूसरे संस्करणों के लिए लिंक, हमसे संपर्क करने के लिए व्यवस्था तथा विषयवस्तु सर्च करने की सुविधा दी गई है। दूसरे, मुख्य मीनू में सभी आवश्यक सेक्शन जैसे समाचार, संपादकीय, सिनेमा, टेलीविजन, फैशन, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य, जीवन, टेक गुरु, विविधा, चुटकुले, नई किताबें, महिला और करियर आदि दिए गए हैं।

तीसरा मीनू केवल रजिस्टर्ड पाठकों के लिए है। साथ ही कम बैंडविथ वाला इंटरनेट कनेक्शन रखने वाले लोगों के लिए साइट को सुविधाजनक रूप से देखने के लिए सेक्शन ‘ब्लॉग’ रखा गया हैं। इस सेक्शन के जरिए साइट में मौजूद पूरी विषय सामग्री को पढ़ा जा सकता है। लेकिन, रचना में मौजूद फोटो आदि इस सेक्शन में नहीं देखे जा सकते हैं।

साइट के मुख्य भाग में सबसे पहले नवीनतम रचनाएं, साथ में सबसे ज्यादा पढ़ी गई रचनाएं रखी गई हैं। इसके तुरंत बाद मुख्य रचना तथा साथ मे दो अन्य रचनाएं रखी गई हैं। खास बात यह है कि इस बार पाठक रचना को पढ़ने के साथ-साथ उसे रेटिंग भी दे सकते हैं। इसके अलावा, रचना को पीडीएफ फॉर्मेट में देखा जा सकता है, उसका प्रिंट लिया जा सकता है, और यही नहीं इसे अपने दोस्तों को भेजा भी जा सकता है। प्रत्येक रचना के साथ उससे संबंधित अन्य रचनाओं के लिंक्स भी दिए जाएंगे। ताकि पाठक रचना से संबंधित अन्य मौजूद जानकारी हासिल कर सकें।

रजिस्टर्ड पाठकों को आने वाले समय में साइट के कुछ अन्य फीचर देखने को मिलेंगे। कंटेंट सिंडीकेशन के लिए RSS वर्जन 0.91, 1.0 और 2.0; एटम 0.3 और OPML की सुविधा हमारे पाठकों को मिलेगी। इस सुविधा की मदद से आप साइट पर किसी भी अपडेट की जानकारी तुरंत अपने कंप्यूटर पर ले सकते हैं। यही नहीं, इसकी मदद से आप अपने ब्लॉग या फेसबुक प्रोफाइल पर साइट कंटेंट को तुरंत देख सकते हैं।

साइट के दायीं ओर नवीनतम घटनाओं के विडियो प्रदर्शित किए जाएंगे। विडियो के ठीक नीचे विभिन्न मॉड्यूल बनाए गए हैं। इनमें आपको इंटरनेट पर मौजूद स्वनामधन्य चेहरों द्वारा रचित आलेख, फोटो गैलरी और विशेष आलेख देखने और पढ़ने के लिए मिलेंगे।

पाठकों द्वारा किसी खास विषय पर अपना मत देने के लिए मतदान की व्यवस्था की गई है। इसके ठीक नीचे आप देख सकते हैं कि इस समय कितने पाठक साइट पर मौजूद हैं।

बहुत ज्यादा संख्या में विज्ञापनों से होने वाली परेशानी से बचने के लिए इसके लिए केवल दो मॉड्यूल रखे गए हैं। सभी विज्ञापन इन्हीं मॉड्यूलों में दिखाए जाएंगे।

साइट के नए रंग रूप को आपके सामने लाने में करीब दो महीने की अथक मेहनत में मेरे कई दोस्तों ने मेरी अविस्मरणीय मदद की है। लोगो डिजायनिंग और रंग संयोजन में मेरी मदद मेरे खास दोस्त विवेक रस्तोगी और आरती वर्मा ने की है। शेष डिजायनिंग और विष्यवस्तु के लिए मैं अपने दोस्त सुनील कुमार सीरीज, वंदना वर्मा, राजीव मिश्रा, आशुतोष भारद्वाज, रविकांत और कनिका शर्मा के योगदान को नजरंदाज नहीं कर सकता। मेरी एक और दोस्त पूनम शर्मा का भी मैं शुक्रगुजार हूं जिनके लगातार उलाहनों की वजहों से मैं इस काम में जुटा रहा।

और हां...मेरी मां का रात में जागकर मेरे लिए दूध और चाय की लगातार व्यवस्था करना, मेरे पापा का बार-बार जागकर सोने के लिए जोर डालना और मेरी तीनों बेटियों का काम के समय लगातार विघ्न डालना मैं कभी नहीं भूल सकता!

शुभकामनाओं सहित

धर्मेंद्र कुमार

New Mediabharti.com: Journey's Next Destination

By Dharmendra Kumar

It is a great pleasure to present you this new version of Mediabharti.com, more attractive and user friendly than the earlier version.

After its launch on March 14, 2002, Mediabharti.com has seen lots of ups and downs in the course of seven years. Lots of friends have been associated with me in this journey, some are still around, others left mid-way but the quest continues with renewed determination and passion. And, today, when I look back I can not help acknowledging the guidance and help of many who stood by me encouraging and helping me in various ways.

I recall that eventful evening when some of us Journalism students were engaged in discussing our future prospects at our Journalism Guru Brij Khandelwal’s Home. The topic of discussion was…How to get entry into the mainstream media. Those of us who had failed to get a job were naturally more concerned and a little frustrated. It was then that Mr. Khandelwal suggested why not started a venture of your own till such time as opportunity start striking at your doors. Your own venture would instill not only skills required but a lot of confidence in your ability. Mediabharti.com would be the ideal platform for you to showcase your talent, Khandelwal Sir said. The idea immediately struck and work began. That is how the seed was sown.

Technical and designing responsibilities were given to another faculty lecturer Vikas Dinkar Pandit. Within days the draft was ready! …From that day, I accepted Brij Khandelwal, as the ‘Father’ of Mediabharti.com and Vika Dinkar Pandit as the ‘Mother’. The baby was conceptualized and born, it needed the loving care and patient nurturing. My beloved Late Rashmi Gupta admirably took upon herself the challenging task of bringing up the baby. I had worked on the dream and she shared every bit of that creative process that went into giving the project a shape and a direction. After her untimely and shocking departure on June 27, 2007, for once I almost gave up and thought of winding up the project but friends provided the moral and emotional support compelling me to change my decision.

So the journey continued and has picked up enough momentum and steam to be a trend setter.

Let me now tell you about the new features that have been incorporated to give it a new look and prove more useful for our valuable fans and user.

Let’s start from the logo. Logo has the same ‘M’ as earlier, to keep reminding us of our struggles and the ups and downs.

For smooth navigation, there are three Menus on site. First is Top Menu, which have Links for Other Editions, Contact us and to search the content in site or on internet.

Second, the Main Menu, has various sections like-- News, Editorials, Cinema, Television, Fashion, Automobile, Health, Life, Tech Guru, Variety, Jokes, Book Shelf, Women and Career.

The third menu is for just registered users.

Along with a section called ‘Blog’ has also given for those visitors, who have a low bandwidth internet connection. In this section, visitor would not be served the images and other heavy content.

In the main body of site, the ‘Latest stories’ and ‘Most Popular’ stories are given. Then the main story is being presented with two other stories. Visitors would now be able to rate stories according to their interests and judgments.

Besides it, the story can be seen in PDF format, print can be taken and even one can send the story to friends. Related stories links also would be provided with each story. There would be more features for registered users.

RSS version 0.91, 1.0, 2.0; Atom 0.3 and OPML service is also available for the visitors. With this service you can get the regular updates on your desktop. Even, you can add this service to your blog or Facebook profile.

Latest videos would be displayed on right hand side.

Below the videos, there are some modules. In these modules, you will get various write ups by well known faces of online media, along with photo gallery and special features.

There is a Poll question too.

Below, you will get the information that how many visitors are viewing the site with you.

There are only two advertisement modules to ensure visitors don’t get irritated or inconvenienced. All the advertisements would be shown in these two modules one by one. And strictly ‘No’ to pop ups.

I like to share with you how I have been helped by my friends who have put in a lot of hard work and imagination. I would like to name some of my friends who helped me in adverse conditions. One of my best friends Vivek Rastogi and also Aarti Verma helped me in logo designing and color combination. I can’t ignore the marvelous contribution of Sunil Kumar Sirij, Vandana Verma, Rajeev Mishra, Ashutosh Bhardwaj, Ravikant and Kanika Sharma in web and content designing. I am also grateful of my friend Poonam Sharma, who keeps scolding me all the time to aim for perfection.

And…yes…I can’t forget those late night teas and milk that was arranged by my Mom, my Dad’s insistence to sleep early and enjoy the disturbance by my lovely daughters trinity…

Best Wishes

Dharmendra Kumar
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