Friday, October 10, 2014

'गैर' तो गैर, 'अपने' ही उड़ा रहे हैं मोदी के 'स्वच्छता अभियान' की धज्जियां

धर्मेंद्र कुमार
डिनर के बाद खाने को मिली 'पारले मेलोडी' की दो टॉफियों में से एक, अपने साथ शाम को पार्क में घूमने वाले मित्र 'तौमर साब' को पकड़ाई तो 'रैपर' उतारते-उतारते याद आया कि हमारे पीएम नरेंद्र मोदी ने 'स्वच्छता अभियान' चलाया हुआ है और हमें यूं ही सड़क पर इन रैपर को नहीं छोड़ना चाहिए।

आस-पास देखा तो कोई ऐसी जगह नहीं मिली जहां इन रैपर को डाला जाता। तौमर साब ने आइडिया दिया, 'जेब में रख लेते हैं, घर जाकर डस्टबिन में डाल देंगे'। तभी, एक पड़ोसी का डस्टबिन दिखाई दिया और हम दोनों ने टॉफी के वे दो रैपर उसमें डाल दिए। इसके साथ ही अपने मन में देश तथा समाज की सेवा कर लेने के अपने 'दायित्व' को पूरा करने का 'संतोष' भी जगा लिया।


गली से निकलकर पार्क में पहुंचे। पार्क में रोजाना की तरह बच्चे वैसे ही खेल रहे थे, कुछ बुजुर्ग वैसे ही 'ज्ञान-ध्यान' की बातें कर रहे थे, कुछ लड़कियां और लड़के अपने-अपने मोबाइल पर 'लगे' हुए थे और हम लोगों ने कुछ अन्य लोगों की तरह ट्रैक पर 'वॉकिंग' शुरू कर दी। एक चौथाई चक्कर ही लगा पाए थे कि तौमर साब ठिठके और बोले... 'अब कर लो अपना दायित्व पूरा...'। पार्क के उस बड़े हिस्से में चारों ओर प्लास्टिक के गिलास, बोतलें कागज-प्लास्टिक की झंडियां, फटे कार्टून, खाने की प्लेट और न जाने क्या-क्या बेतरतीब पड़ा हुआ था। आदत के अनुसार, हमने अपना कैमरा निकाल लिया और लगे फोटोग्राफी करने... साथ घूम रहे अन्य लोगों से पता किया तो उन्होंने बताया कि यहां अभी-अभी क्षेत्रीय भाजपा प्रत्याशी ने सभा की है। उन्होंने लोगों से उन्हें वोट देने की अपील की है और हल्की-फुल्की दावत भी दी है।

सुबह जब पार्क में दोबारा पहुंचे तो पार्क को रात की ही तरह 'बदहाल' पाया। इस बार फिर कुछ और फोटो खींचे। कुछ कांग्रेस के समर्थक लग रहे बुजुर्गों ने जब फोटो खींचते देखा तो बोले कि 'बीजेपी का झंडा जरूर फोटो में ले लीजिएगा'। अब मन में सीधा सवाल यह उठा कि ये लोग किस मुंह से मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। मेरी जब भी किसी भाजपा प्रत्याशी से उनकी 'जीत' को लेकर कोई बात हुई है तो 'लगभग' सबने यह कहा है कि 'मोदी जी के चलते सभी पार्टी प्रत्याशियों का बेड़ा पार तय है'।

बातों - बातों में पता चला कि नजदीक के दूसरे पार्क में बीती रात कांग्रेस के प्रत्याशी ने भी सभा की है... और केवल सभा ही नहीं बल्कि 'भंडारा' भी किया है तो उत्सुकतावश दूसरे पार्क में जाने की इच्छा बलवती हुई। वहां पहुंचे तो नजारा और भी 'बेहतरीन' था... उन्होंने पार्क के केवल एक हिस्से में ही आयोजन न करके पूरे पार्क का प्रयोग अपने प्रयोजन के लिए कर लिया था। चारों तरफ प्लास्टिक के गिलास, बोतलें, कागज-प्लास्टिक की झंडियां, डंडे, फटे कार्टून, खाने की प्लेट और बैनर आदि बिखरे पड़े थे। पेड़ और पौधों के चारों ओर प्लास्टिक की झंडिया लपेट दी गई थीं। यहां भी कुछ बुजुर्ग मिले जिन्होंने कहा कि 'कांग्रेस के झंडों को फोटो में जरूर ले लीजिएगा'।

फोटो-वोटो ले लेने के बाद हमने कुछ बुजुर्गों को इकट्ठाकर प्रस्ताव रखा कि इन दोनों पार्कों की सफाई करते हैं और उनका भी फोटो लेकर यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि हमारे भावी जनप्रतिनिधि किस तरह 'बिगाड़ने' में लगे हुए हैं और आम जनता किस तरह इसे 'संवारने' में लगी है। यह सुनते ही उनमें से कई वहां से 'खिसकना' शुरू हो गए। हालांकि, तभी निगम के सफाईकर्मियों ने वहां आकर अपना रोज का 'अभियान' शुरू कर दिया।

अब सवाल यह है कि जिस देश का 'प्रधान सेवक' देश की जनता से यह आह्वान कर रहा है कि अपने आस-पास सफाई रखी जाए, उसी के अन्य 'लघु सेवक' इस प्रक्रिया में अपना क्या 'योगदान' दे रहे हैं। चूंकि प्रधानमंत्री ने रेडियो पर अपने 'मन की बात' बताने के दौरान कहा था कि अगर आप कोई भी विसंगति या सुझाव देना चाहते हैं तो सबूत और पर्याप्त सामग्री के साथ उन्हें उनतक भेजें, वह निजी तौर पर उसे देखेंगे और कार्रवाई करेंगे तो यह ब्योरा हम उन्हें उनकी वेबसाइट के जरिए फोटो सहित भेज रहे हैं। देखना है कि वह इसपर कैसे संज्ञान लेते हैं...।
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