Friday, January 22, 2010

यादों को सहेजना है...!

यादों को सहेजकर रखने का पुराना शगल रहा है। फोटोग्राफ इसका एक माध्यम है। श्वेत-श्याम से लेकर रंगीन फोटोग्राफ तक हमारे घरों में संभालकर रखे हुए हैं। बीते दशक के दौरान तकनीक में आए कई बदलावों के चलते यहां भी परिवर्तन दिखता है। अब इलेक्ट्रॉनिक रूप से फोटो को सहेजा जा सकता है। डिजिटल फोटो को सीडी, डीवीडी, कंप्यूटर या ऐसी ही किसी युक्ति को प्रयोग में लाकर संभालकर रखा जा सकता है। लेकिन अब बहस यह है कि कौन सी व्यवस्था सुरक्षित है? कागज पर उतारकर रखे गए फोटो या डिजिटल फॉर्म में रखे गए 'इमेज्स'। अपने-अपने तर्क हैं। उचित देखभाल न करने पर दोनों ही तरह से रखे गए फोटो खराब हो सकते हैं।

आगरा के संजय गोयल फोटो को कागज पर उतारकर सहेजने पर जोर देते हैं जबकि एक और पाठक, जिन्होंने अपना नाम नहीं लिखा है, सभी फोटो को तुरंत इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलने की सलाह दे रहे हैं। मुझे तो लगता है कि दोनों ही तरीके अपनाए जाने चाहिए... आखिरकार इनसे हमारी भावनाएं जुड़ी होती हैं। हमारे सुख, दुख के कई पल इन फोटो में समाहित होते हैं। हां, यह थोड़ा महंगा जरूर पड़ेगा, लेकिन यादों का मामला है भाई! पढ़ लीजिए काम आ सकता है...। साथ ही अपना एक पुराना फोटो भी दिखा रहा हूं, श्वेत-श्याम। ये तब का है जब मैं पहली कक्षा में पढ़ता था। दाएं से दूसरा मैं ही हूं...:)
--धर्मेंद्र कुमार

Digital storage is as good as saving phtos in photo albums, the only reasons that you loose your photographs are ignorance and incomplete knowledge of using your gadgets.

Few points to adopt for safe computing.

1. Always get partioned your hard disk (c:, d:, etc.,)

2. Always store your data or photographs in d:, e:, etc partitions, never on c: drive)

3. Always use genuine good Antivirus and keep it update.

4. Never rely on local media (as speed give digital photo on unbranded cheap media). Always use good quality media which ensures long life storage.

Idea of digital imaging is take multiple photographs for example 100-200, transfer it on computer select the good ones for example 10-20, get printed only good ones. which help you to save money. It is different from previous technology where you come to know whether photos are good or not only after your film role get developed. (Already lost some Rs.100-200).

Any technology if we use wisely is helpful else it can make us helpless any time.
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